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गोपनीयता टूल चुनते समय होने वाली आम गलतियाँ और उन्हें कैसे करें दूर

द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-10

गोपनीयता टूल चुनते समय होने वाली आम गलतियाँ और उन्हें कैसे करें दूर

गोपनीयता टूल चुनना उतना सरल नहीं जितना लगता है। लोग अक्सर अपने निजता के लक्ष्यों को पूरा करने के बजाय मार्केटिंग के जाल में फंस जाते हैं। चाहे वह सुरक्षित ईमेल सेवा हो, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप हो या गोपनीय ब्राउज़र, हर टूल के अपने फायदे और सीमाएँ होती हैं। इस लेख में हम उन सबसे आम गलतियों का विश्लेषण करेंगे जो लोग गोपनीयता टूल चुनते समय करते हैं, और बताएंगे कि कैसे इन गलतियों से बचा जा सकता है।

गोपनीयता टूल चुनने से पहले लक्ष्य स्पष्ट न करना

लोग अक्सर बिना यह जाने ही गोपनीयता टूल चुनना शुरू कर देते हैं कि वे वास्तव में किस तरह की सुरक्षा चाहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति ईमेल एन्क्रिप्शन चाहता है, लेकिन वह यह नहीं सोचता कि उसे सिर्फ बाहरी हमलों से बचना है या सरकारी निगरानी से भी। इसी तरह, मैसेजिंग ऐप चुनते समय लोग सिर्फ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को देखते हैं, जबकि मेटाडेटा सुरक्षा (जैसे किससे बात की, कब की) भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

ब्राउज़र चुनते समय भी यही स्थिति होती है। लोग गोपनीयता-बढ़ाने वाले ब्राउज़र को चुनते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि उन्हें ट्रैकर्स ब्लॉक करने हैं, अपनी आईपी छुपानी है, या फिर Tor जैसे नेटवर्क पर जाना है। बिना स्पष्ट लक्ष्य के टूल चुनने से या तो जरूरत से ज्यादा सुरक्षा मिलती है (जिससे सुविधा कम हो जाती है) या फिर अपर्याप्त सुरक्षा रह जाती है।

व्यावहारिक सुझाव: सबसे पहले यह लिख लें कि आपको किस प्रकार की गोपनीयता चाहिए। क्या आपको सिर्फ अपने संदेशों को सुरक्षित रखना है? क्या आपको अपने ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक होने से बचाना है? क्या आपको सरकारी या कॉर्पोरेट निगरानी से बचना है? इन सवालों के जवाब से आपके टूल चयन का आधार तैयार होगा।

सिर्फ एन्क्रिप्शन देखकर टूल चुन लेना

गोपनीयता टूल चुनते समय लोगों की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है सिर्फ एन्क्रिप्शन को देखकर फैसला लेना। एन्क्रिप्शन जरूरी है, लेकिन यह अकेला काफी नहीं होता। उदाहरण के लिए, कई ईमेल सेवाएं एन्क्रिप्टेड कनेक्शन तो प्रदान करती हैं, लेकिन वे आपके डेटा को अपने सर्वर पर स्टोर करती हैं। इसका मतलब है कि अगर कंपनी के सर्वर हैक हो जाते हैं, तो आपका डेटा भी खतरे में पड़ सकता है।

मैसेजिंग ऐप चुनते समय भी लोग सिर्फ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन वे यह नहीं देखते कि कंपनी डिफॉल्ट रूप से किस तरह के मेटाडेटा को स्टोर करती है। उदाहरण के लिए, कुछ ऐप सिर्फ आपकी बातचीत को एन्क्रिप्ट करते हैं, लेकिन आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, लोकेशन डेटा या कॉल रिकॉर्ड को स्टोर करते रहते हैं।

ब्राउज़र चुनते समय लोग ट्रैकर्स ब्लॉक करने वाले ब्राउज़र को चुन लेते हैं, लेकिन वे यह नहीं देखते कि ब्राउज़र खुद ही किस तरह के डेटा को अपने सर्वर पर लॉग करता है।

व्यावहारिक सुझाव: एन्क्रिप्शन के अलावा इन बातों पर भी ध्यान दें:

  • क्या कंपनी आपके डेटा को स्टोर करती है? अगर हाँ, तो किस तरह के डेटा को?
  • क्या कंपनी सरकारी अनुरोधों का जवाब देती है?
  • क्या कंपनी का सर्वर कहाँ स्थित है? (कुछ देशों के कानून दूसरों की तुलना में ज्यादा गोपनीयता के अनुकूल होते हैं।)
  • क्या कंपनी ओपन-सोर्स है? ओपन-सोर्स टूल्स में पारदर्शिता होती है, जिससे यह पता चलता है कि वास्तव में क्या हो रहा है।

मुफ्त टूल्स पर भरोसा कर लेना

लोग अक्सर मुफ्त गोपनीयता टूल्स को चुन लेते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि उन्हें बिना पैसे खर्च किए सुरक्षा मिल रही है। लेकिन सच यह है कि मुफ्त टूल्स अक्सर पैसे कमाने के दूसरे तरीकों पर निर्भर होते हैं, जैसे कि आपकी गतिविधि का डेटा बेचना या विज्ञापन दिखाना। उदाहरण के लिए, कुछ मुफ्त ईमेल सेवाएं आपके ईमेल के कंटेंट को स्कैन करती हैं ताकि वे आपकी रुचि के आधार पर विज्ञापन दिखा सकें।

मुफ्त मैसेजिंग ऐप भी इसी तरह काम करते हैं। वे आपकी बातचीत को एन्क्रिप्ट कर सकते हैं, लेकिन वे आपकी गतिविधि डेटा को तीसरे पक्ष को बेच सकते हैं। इसी तरह, मुफ्त ब्राउज़र एक्सटेंशन आपकी ब्राउज़िंग गतिविधि को ट्रैक कर सकते हैं और उसे बेच सकते हैं।

व्यावहारिक सुझाव: मुफ्त टूल्स का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • क्या कंपनी विज्ञापन या डेटा बेचकर पैसा कमाती है?
  • क्या कंपनी के पास गोपनीयता नीति है जो स्पष्ट रूप से बताती है कि वे आपका डेटा कैसे इस्तेमाल करते हैं?
  • क्या आप उनकी सेवाओं के बदले में कुछ और दे रहे हैं? (जैसे आपकी गतिविधि डेटा।)

अगर आप गंभीर गोपनीयता चाहते हैं, तो ऐसे टूल्स का चयन करें जो सीधे तौर पर पैसे लेकर काम करते हैं। ये कंपनियां आमतौर पर आपके डेटा को बेचकर पैसा नहीं कमातीं।

यूजर फ्रेंडलीनेस को नजरअंदाज कर देना

गोपनीयता टूल्स अक्सर तकनीकी ज्ञान की मांग करते हैं। लोग सोचते हैं कि अगर टूल ज्यादा सुरक्षित है, तो उसे इस्तेमाल करना भी मुश्किल होगा। लेकिन सच यह है कि अगर टूल इस्तेमाल करने में मुश्किल है, तो लोग उसका इस्तेमाल छोड़ देंगे और वापस असुरक्षित तरीकों पर आ जाएंगे।

person using laptop secure email screen

उदाहरण के लिए, कुछ सुरक्षित ईमेल सेवाएं इतनी जटिल हैं कि लोग उन्हें इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। इसी तरह, कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स को सेटअप करना इतना मुश्किल होता है कि लोग आसान ऐप्स पर वापस चले जाते हैं। ब्राउज़र एक्सटेंशन भी इसी तरह काम करते हैं। अगर एक्सटेंशन कन्फ़िगर करना मुश्किल है, तो लोग उसे बंद कर देते हैं और ट्रैकर्स को अपने ब्राउज़र पर आने देते हैं।

व्यावहारिक सुझाव: ऐसे टूल्स का चयन करें जो इस्तेमाल करने में आसान हों। देखें कि:

  • क्या टूल की सेटअप प्रक्रिया सरल है?
  • क्या टूल का इंटरफेस सहज है?
  • क्या टूल का इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है?
  • क्या टूल के साथ अच्छे ट्यूटोरियल या ग्राहक सहायता उपलब्ध है?

अगर टूल इस्तेमाल करने में मुश्किल है, तो इसकी सुरक्षा कितनी भी अच्छी क्यों न हो, आप उसका पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगे।

सिर्फ लोकप्रियता देखकर टूल चुन लेना

लोग अक्सर किसी टूल की लोकप्रियता देखकर उसे चुन लेते हैं, बिना यह जाने कि वह टूल उनकी जरूरतों के अनुकूल है या नहीं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए ProtonMail चुन लेता है क्योंकि वह लोकप्रिय है, जबकि उसे असल में सिर्फ एक साधारण एन्क्रिप्टेड ईमेल सेवा चाहिए होती है। इसी तरह, लोग सिर्फ इसलिए Signal चुन लेते हैं क्योंकि वह प्रसिद्ध है, जबकि उन्हें असल में सिर्फ एक साधारण मैसेजिंग ऐप चाहिए होता है।

ब्राउज़र चुनते समय भी लोग सिर्फ लोकप्रियता देखकर फैसला ले लेते हैं। वे बिना यह जाने ब्राउज़र चुन लेते हैं कि क्या वह उनकी गोपनीयता जरूरतों को पूरा करता है।

व्यावहारिक सुझाव: लोकप्रियता एक अच्छा शुरुआती बिंदु हो सकती है, लेकिन इसे ही अंतिम मानदंड न बनाएं। देखें कि:

  • क्या टूल आपकी विशिष्ट जरूरतों को पूरा करता है?
  • क्या टूल के फीचर्स आपकी जरूरतों के अनुकूल हैं?
  • क्या टूल का इस्तेमाल करने में कोई तकनीकी बाधा है?
  • क्या टूल की गोपनीयता नीति स्पष्ट और भरोसेमंद है?

अगर टूल लोकप्रिय है, लेकिन आपकी जरूरतों के अनुकूल नहीं है, तो वह टूल आपके लिए बेकार है।

अपडेट्स और सपोर्ट को नजरअंदाज कर देना

गोपनीयता टूल्स को नियमित रूप से अपडेट किया जाना चाहिए ताकि वे नए खतरों और कमजोरियों से सुरक्षित रह सकें। लोग अक्सर ऐसे टूल्स चुन लेते हैं जो लंबे समय से अपडेट नहीं हुए हैं, या जिनका सपोर्ट अच्छा नहीं है। उदाहरण के लिए, कुछ पुराने ब्राउज़र एक्सटेंशन ऐसे होते हैं जो नए ब्राउज़र वर्जन्स के साथ काम नहीं करते। इसी तरह, कुछ ईमेल सेवाएं ऐसी होती हैं जो नए सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करतीं।

मैसेजिंग ऐप भी इसी तरह काम करते हैं। अगर ऐप को नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जाता, तो उसमें नई कमजोरियां आ सकती हैं जिन्हें ठीक नहीं किया गया है। इसी तरह, अगर कंपनी का सपोर्ट अच्छा नहीं है, तो आप किसी समस्या का सामना करने पर मदद नहीं पा सकेंगे।

व्यावहारिक सुझाव: टूल चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें:

  • क्या टूल नियमित रूप से अपडेट होता है?
  • क्या कंपनी नई सुरक्षा कमजोरियों का जल्दी जवाब देती है?
  • क्या कंपनी का ग्राहक सपोर्ट अच्छा है?
  • क्या कंपनी के पास एक सक्रिय समुदाय है जो टूल के विकास में मदद करता है?

अगर टूल को लंबे समय से अपडेट नहीं किया गया है, तो हो सकता है कि वह नए खतरों से सुरक्षित न हो।

ओपन-सोर्स बनाम बंद-सोर्स टूल्स का गलत चुनाव

लोग अक्सर ओपन-सोर्स और बंद-सोर्स टूल्स के बीच फर्क नहीं समझ पाते। ओपन-सोर्स टूल्स वे होते हैं जिनका सोर्स कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है, और कोई भी उसे देख सकता है। बंद-सोर्स टूल्स वे होते हैं जिनका सोर्स कोड गुप्त रखा जाता है।

लोग अक्सर सोचते हैं कि ओपन-सोर्स टूल्स हमेशा बेहतर होते हैं, क्योंकि उनमें पारदर्शिता होती है। लेकिन सच यह है कि ओपन-सोर्स टूल्स भी खराब क्वालिटी के हो सकते हैं अगर उन्हें ठीक से डेवलप नहीं किया गया हो। इसी तरह, बंद-सोर्स टूल्स भी अच्छे हो सकते हैं अगर कंपनी भरोसेमंद हो।

व्यावहारिक सुझाव: ओपन-सोर्स और बंद-सोर्स टूल्स के बीच चुनाव करते समय इन बातों पर ध्यान दें:

  • क्या टूल का सोर्स कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है?
  • क्या टूल का ऑडिट किया गया है?
  • क्या टूल का इस्तेमाल करने वाले लोगों का समुदाय बड़ा और सक्रिय है?
  • क्या कंपनी भरोसेमंद है और उसकी गोपनीयता नीति स्पष्ट है?

अगर आप ओपन-सोर्स टूल चुन रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसका सोर्स कोड नियमित रूप से अपडेट किया जाता है और उसका ऑडिट किया गया है। अगर आप बंद-सोर्स टूल चुन रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि कंपनी भरोसेमंद है और उसकी गोपनीयता नीति स्पष्ट है।

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गलत टूल चुनने के परिणाम

गलत गोपनीयता टूल चुनने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अगर आपका ईमेल एन्क्रिप्टेड नहीं है, तो आपका संवेदनशील डेटा लीक हो सकता है। अगर आपका मैसेजिंग ऐप मेटाडेटा स्टोर करता है, तो आपकी बातचीत की पूरी तस्वीर तीसरे पक्ष को मिल सकती है। अगर आपका ब्राउज़र ट्रैकर्स को ब्लॉक नहीं करता, तो आपकी ऑनलाइन गतिविधि ट्रैक की जा सकती है।

इन गलतियों के परिणामस्वरूप आपकी निजता खतरे में पड़ सकती है, आपकी पहचान चोरी हो सकती है, या आपकी ऑनलाइन गतिविधि का इस्तेमाल आपके खिलाफ किया जा सकता है। इसलिए, गोपनीयता टूल चुनते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

सही गोपनीयता टूल चुनने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका

अब जब हमने उन आम गलतियों का विश्लेषण कर लिया है जो लोग गोपनीयता टूल चुनते समय करते हैं, तो आइए जानते हैं कि सही टूल कैसे चुना जाए।

1. अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें

सबसे पहले, यह लिख लें कि आपको किस प्रकार की गोपनीयता चाहिए। क्या आपको सिर्फ अपने संदेशों को सुरक्षित रखना है? क्या आपको अपने ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक होने से बचाना है? क्या आपको सरकारी या कॉर्पोरेट निगरानी से बचना है? इन सवालों के जवाब से आपके टूल चयन का आधार तैयार होगा।

2. फीचर्स के अलावा सुरक्षा और पारदर्शिता पर ध्यान दें

एन्क्रिप्शन के अलावा इन बातों पर भी ध्यान दें:

  • क्या कंपनी आपके डेटा को स्टोर करती है? अगर हाँ, तो किस तरह के डेटा को?
  • क्या कंपनी सरकारी अनुरोधों का जवाब देती है?
  • क्या कंपनी का सर्वर कहाँ स्थित है?
  • क्या कंपनी ओपन-सोर्स है?
  • क्या कंपनी का ऑडिट किया गया है?

3. मुफ्त टूल्स से सावधान रहें

मुफ्त टूल्स अक्सर आपकी गतिविधि डेटा को बेचकर पैसा कमाते हैं। अगर आप गंभीर गोपनीयता चाहते हैं, तो ऐसे टूल्स का चयन करें जो सीधे तौर पर पैसे लेकर काम करते हैं।

4. यूजर फ्रेंडलीनेस को प्राथमिकता दें

ऐसे टूल्स का चयन करें जो इस्तेमाल करने में आसान हों। देखें कि:

  • क्या टूल की सेटअप प्रक्रिया सरल है?
  • क्या टूल का इंटरफेस सहज है?
  • क्या टूल का इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं है?
  • क्या टूल के साथ अच्छे ट्यूटोरियल या ग्राहक सहायता उपलब्ध है?

5. लोकप्रियता के बजाय जरूरतों पर ध्यान दें

लोकप्रियता एक अच्छा शुरुआती बिंदु हो सकती है, लेकिन इसे ही अंतिम मानदंड न बनाएं। देखें कि टूल आपकी विशिष्ट जरूरतों को पूरा करता है या नहीं।

6. अपडेट्स और सपोर्ट को प्राथमिकता दें

टूल चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें:

  • क्या टूल नियमित रूप से अपडेट होता है?
  • क्या कंपनी नई सुरक्षा कमजोरियों का जल्दी जवाब देती है?
  • क्या कंपनी का ग्राहक सपोर्ट अच्छा है?
  • क्या कंपनी के पास एक सक्रिय समुदाय है?
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7. ओपन-सोर्स बनाम बंद-सोर्स का सही चुनाव करें

ओपन-सोर्स टूल्स में पारदर्शिता होती है, लेकिन उनका सोर्स कोड नियमित रूप से अपडेट किया जाना चाहिए। बंद-सोर्स टूल्स भी अच्छे हो सकते हैं अगर कंपनी भरोसेमंद हो।

कुछ लोकप्रिय गोपनीयता टूल्स का तुलनात्मक विश्लेषण

आइए अब कुछ लोकप्रिय गोपनीयता टूल्स का तुलनात्मक विश्लेषण करें ताकि आपको यह समझने में मदद मिल सके कि कौन सा टूल आपकी जरूरतों के अनुकूल है।

सुरक्षित ईमेल सेवाएं

  • ProtonMail: यह एक लोकप्रिय सुरक्षित ईमेल सेवा है जो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करती है। कंपनी स्विट्जरलैंड में स्थित है, जहाँ गोपनीयता कानून बहुत सख्त हैं। यह मुफ्त और पेड दोनों तरह के प्लान्स प्रदान करती है। हालांकि, मुफ्त प्लान में कुछ सीमाएँ होती हैं, जैसे कि आप प्रति दिन सिर्फ 150 संदेश भेज सकते हैं।

  • Tutanota: यह भी एक लोकप्रिय सुरक्षित ईमेल सेवा है जो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होती है। कंपनी जर्मनी में स्थित है और इसकी गोपनीयता नीति बहुत सख्त है। Tutanota मुफ्त और पेड दोनों तरह के प्लान्स प्रदान करती है।

एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स

  • Signal: Signal सबसे लोकप्रिय एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स में से एक है। यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है और मेटाडेटा को स्टोर नहीं करता। Signal पूरी तरह से ओपन-सोर्स है और इसका ऑडिट किया गया है। यह मुफ्त है और इसमें कोई विज्ञापन नहीं है।

  • Session: Session एक डिसेंट्रलाइज्ड मैसेजिंग ऐप है जो ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है और आपकी पहचान को पूरी तरह से छुपाता है। Session मुफ्त है और इसमें कोई मेटाडेटा स्टोर नहीं किया जाता।

गोपनीय ब्राउज़र

  • Tor Browser: Tor Browser एक ऐसा ब्राउज़र है जो आपको ट्रैकर्स से बचाता है और आपकी आईपी छुपाता है। यह पूरी तरह से ओपन-सोर्स है और इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान है। हालांकि, Tor Browser का इस्तेमाल करते समय वेबसाइटें थोड़ी धीमी हो सकती हैं क्योंकि आपका ट्रैफिक कई सर्वर्स से होकर गुजरता है।

  • Brave Browser: Brave Browser एक ऐसा ब्राउज़र है जो डिफॉल्ट रूप से ट्रैकर्स और विज्ञापनों को ब्लॉक करता है। यह ओपन-सोर्स है और इसमें एन्क्रिप्टेड DNS सपोर्ट है। Brave Browser का इस्तेमाल करना बहुत आसान है और यह तेज़ भी है।

निष्कर्ष

गोपनीयता टूल चुनना एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लोगों द्वारा की जाने वाली सबसे आम गलतियाँ हैं: स्पष्ट लक्ष्यों का न होना, सिर्फ एन्क्रिप्शन देखकर टूल चुन लेना, मुफ्त टूल्स पर भरोसा कर लेना, यूजर फ्रेंडलीनेस को नजरअंदाज कर देना, लोकप्रियता देखकर टूल चुन लेना, अपडेट्स और सपोर्ट को नजरअंदाज कर देना, और ओपन-सोर्स बनाम बंद-सोर्स का गलत चुनाव कर लेना।

इन गलतियों से बचने के लिए, सबसे पहले अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें, फीचर्स के अलावा सुरक्षा और पारदर्शिता पर ध्यान दें, मुफ्त टूल्स से सावधान रहें, यूजर फ्रेंडलीनेस को प्राथमिकता दें, लोकप्रियता के बजाय जरूरतों पर ध्यान दें, अपडेट्स और सपोर्ट को प्राथमिकता दें, और ओपन-सोर्स बनाम बंद-सोर्स का सही चुनाव करें।

अगर आप इन सुझावों का पालन करते हैं, तो आप ऐसे गोपनीयता टूल चुन पाएंगे जो वास्तव में आपकी जरूरतों को पूरा करते हैं और आपकी निजता की रक्षा करते हैं।

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