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गूगल अब ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में उपयोगकर्ताओं के आईपी पतों का उपयोग करेगा विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण के लिए

द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-18

गूगल अब ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में उपयोगकर्ताओं के आईपी पतों का उपयोग करेगा विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण के लिए

गूगल ने घोषणा की है कि 3 अगस्त 2026 से वह ब्रिटेन, यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) और स्विट्जरलैंड के उपयोगकर्ताओं के आईपी पतों का उपयोग विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण और मापन के लिए करेगा। यह बदलाव उन क्षेत्रों में हो रहा है जहां आईपी पता जीडीपीआर के तहत व्यक्तिगत डेटा माना जाता है। इससे उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन प्रदर्शन में अधिक व्यक्तिगत अनुभव मिलेगा, लेकिन उनकी गोपनीयता संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। गूगल का यह कदम तकनीकी क्षेत्र में गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।

इस बदलाव के साथ ही गूगल आईएबी यूरोप ट्रांसपेरेंसी एंड कंसेंट फ्रेमवर्क (टीसीएफ) के तहत "फीचर 3: स्वचालित रूप से प्रसारित जानकारी के आधार पर डिवाइस की पहचान" के तहत पंजीकृत होगा। यह फ्रेमवर्क उपयोगकर्ताओं की सहमति लेने के लिए बनाया गया है। गूगल का कहना है कि यह बदलाव गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों (पीईटी) जैसे ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग, ट्रस्टेड एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट्स और सिक्योर मल्टी-पार्टी कंप्यूटेशन पर आधारित होगा। हालांकि, कुछ व्यक्तिगतीकरण सुविधाएं इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक उपलब्ध नहीं होंगी।

गोपनीयता कानूनों का बदलता परिदृश्य और गूगल की रणनीति

गूगल का यह कदम उन क्षेत्रों में हो रहा है जहां आईपी पता जीडीपीआर के तहत व्यक्तिगत डेटा माना जाता है। जीडीपीआर के अनुसार, व्यक्तिगत डेटा की परिभाषा बहुत व्यापक है और इसमें आईपी पता भी शामिल है। इसका मतलब है कि गूगल को इन क्षेत्रों में उपयोगकर्ताओं की स्पष्ट सहमति लेने की आवश्यकता होगी। इससे पहले, गूगल का कहना था कि आईपी पते का उपयोग डिवाइस की पहचान करने के लिए "गलत" है, क्योंकि उपयोगकर्ता इसे कुकी की तरह आसानी से हटा नहीं सकते। लेकिन अब गूगल ने अपना रुख बदल दिया है और आईपी पते का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

यह बदलाव गोपनीयता कानूनों के बदलते परिदृश्य का हिस्सा है। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में गोपनीयता कानूनों को और सख्त किया जा रहा है, जिससे कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की सहमति लेने के लिए अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। गूगल का यह कदम तकनीकी क्षेत्र में गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। गूगल का कहना है कि यह बदलाव उपयोगकर्ताओं को अधिक व्यक्तिगत विज्ञापन अनुभव प्रदान करेगा, जबकि उनकी गोपनीयता की रक्षा भी करेगा।

आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण: तकनीकी विवरण और चुनौतियां

आईपी पते का उपयोग डिवाइस की पहचान करने के लिए एक सामान्य तरीका है, खासकर तब जब कुकी उपलब्ध नहीं होती हैं। आईपी पता एक डिवाइस को इंटरनेट पर पहचानने वाला अद्वितीय पता होता है। जब कोई उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट या ऐप पर जाता है, तो उसका आईपी पता स्वचालित रूप से उस सेवा को भेजा जाता है। गूगल इस आईपी पते का उपयोग उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत विज्ञापन दिखाने के लिए करेगा।

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हालांकि, आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण की अपनी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आईपी पता हमेशा एक डिवाइस की पहचान नहीं करता है। कई बार एक ही आईपी पता कई उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा किया जाता है, जैसे कि सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर। इसके अलावा, आईपी पता उपयोगकर्ता के स्थान की जानकारी भी प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। गूगल का कहना है कि वह गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों का उपयोग करेगा, जैसे ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग, ट्रस्टेड एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट्स और सिक्योर मल्टी-पार्टी कंप्यूटेशन।

उपयोगकर्ताओं के लिए नए विकल्प और सहमति मॉडल

गूगल के इस बदलाव के साथ उपयोगकर्ताओं को अपने आईपी पते के आधार पर व्यक्तिगतीकरण के लिए नए विकल्प मिलेंगे। गूगल का कहना है कि वह अपने प्लेटफार्मों पर उपयोगकर्ताओं को आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण के लिए विकल्प प्रदान करेगा। इससे उपयोगकर्ताओं को अपने विज्ञापन अनुभव को नियंत्रित करने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये विकल्प कितने प्रभावी होंगे और उपयोगकर्ताओं को कितनी आसानी से मिलेंगे।

गूगल आईएबी यूरोप ट्रांसपेरेंसी एंड कंसेंट फ्रेमवर्क (टीसीएफ) के तहत "फीचर 3" के रूप में पंजीकृत होगा। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को उनकी सहमति देने के लिए स्पष्ट विकल्प प्रदान किए जाएंगे। टीसीएफ फ्रेमवर्क उपयोगक purposes के लिए सहमति लेने के लिए बनाया गया है, जिसमें व्यक्तिगतीकरण भी शामिल है। गूगल का कहना है कि यह फ्रेमवर्क उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण को सक्षम बनाएगा।

विज्ञापन उद्योग पर प्रभाव: प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलाव

गूगल का यह कदम विज्ञापन उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। सबसे पहले, यह अन्य विज्ञापन प्लेटफार्मों के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है। यदि गूगल आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण का उपयोग करता है, तो अन्य कंपनियों को भी इसे अपनाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इससे विज्ञापन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिल सकते हैं।

दूसरे, यह बदलाव विज्ञापन तकनीक के विकास को गति दे सकता है। गूगल का कहना है कि वह गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों जैसे ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग और ट्रस्टेड एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट्स का उपयोग करेगा। ये तकनीकें विज्ञापन उद्योग में नए मानक स्थापित कर सकती हैं और उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण को सक्षम बना सकती हैं।

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गोपनीयता समूहों और नियामकों की प्रतिक्रिया

गूगल के इस कदम के बाद गोपनीयता समूहों और नियामकों की प्रतिक्रिया की उम्मीद है। कुछ समूह इस बदलाव का स्वागत कर सकते हैं, खासकर यदि गूगल उपयोगकर्ताओं को वास्तविक नियंत्रण और पारदर्शिता प्रदान करता है। दूसरों को चिंता हो सकती है कि आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता का उल्लंघन कर सकता है, खासकर तब जब उपयोगकर्ता स्पष्ट रूप से सहमति नहीं देते।

नियामकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। जीडीपीआर और यूरोपीय संघ के अन्य गोपनीयता कानूनों के तहत, कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की सहमति लेने के लिए बाध्य किया जाता है। गूगल का यह कदम देखते हुए नियामकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपयोगकर्ताओं की सहमति वास्तव में स्वतंत्र और सूचित हो। यदि गूगल उपयोगकर्ताओं को वास्तविक विकल्प प्रदान नहीं करता है, तो नियामक कार्रवाई कर सकते हैं।

व्यवसायों और विपणनकर्ताओं के लिए व्यावहारिक सलाह

व्यवसायों और विपणनकर्ताओं को गूगल के इस बदलाव के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। सबसे पहले, उन्हें यह समझना होगा कि आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण कैसे काम करता है और इसका उनके विज्ञापन अभियानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्हें गूगल के नए टूल्स और सुविधाओं का उपयोग करने के लिए तैयार रहना होगा।

दूसरे, उन्हें उपयोगकर्ताओं की सहमति लेने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रियाओं को अपनाना होगा। इसका मतलब है कि उन्हें उपयोगकर्ताओं को उनके डेटा के उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान करनी होगी और उन्हें सहमति देने या न देने के वास्तविक विकल्प प्रदान करने होंगे। तीसरे, उन्हें गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों जैसे ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग और ट्रस्टेड एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट्स के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और उन्हें अपने विज्ञापन अभियानों में शामिल करना चाहिए।

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तकनीकी विशेषज्ञों और डेवलपर्स के लिए निहितार्थ

तकनीकी विशेषज्ञों और डेवलपर्स के लिए गूगल के इस बदलाव के महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। सबसे पहले, उन्हें यह समझना होगा कि आईपी आधारित व्यक्तिगतीकरण तकनीकी रूप से कैसे काम करता है और इसे अपने एप्लिकेशन और सेवाओं में कैसे एकीकृत किया जा सकता है। उन्हें गूगल के एपीआई और टूल्स का उपयोग करने के लिए तैयार रहना होगा।

दूसरे, उन्हें गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों जैसे ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग, ट्रस्टेड एक्जीक्यूशन एनवायरनमेंट्स और सिक्योर मल्टी-पार्टी कंप्यूटेशन के बारे में गहराई से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इन तकनीकों का उपयोग करके वे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए विज्ञापन व्यक्तिगतीकरण को सक्षम बना सकते हैं। तीसरे, उन्हें गूगल के नए फ्रेमवर्क और मानकों के साथ अपडेट रहना होगा और उन्हें अपने विकास कार्य में शामिल करना होगा।

भविष्य का दृष्टिकोण: गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण का संतुलन

गूगल का यह कदम गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में हम देख सकते हैं कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं, जिससे विज्ञापन उद्योग में गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण के बीच एक नया संतुलन स्थापित हो सके।

हालांकि, यह संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए व्यक्तिगतीकरण को सक्षम बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। गूगल जैसे तकनीकी दिग्गजों को उपयोगकर्ताओं की अपेक्षाओं और नियामकों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना होगा। भविष्य में हम देख सकते हैं कि गोपनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों का विकास और उपयोग तेजी से बढ़ेगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिल सकेगा।

गोपनीयता और व्यक्तिगतीकरण के बीच संतुलन बनाने के लिए तकनीकी नवाचार और नियामक ढांचे दोनों की आवश्यकता होगी। गूगल का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और आने वाले वर्षों में हम देख सकते हैं कि विज्ञापन उद्योग कैसे विकसित होता है और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करता है।

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