डेटा सेंटर निर्माण में 2026 की पहली तिमाही में ही रुके 75 से ज्यादा प्रोजेक्ट, $130 अरब का निवेश ठंडा
द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-14

2026 की शुरुआत से ही अमेरिका में डेटा सेंटर निर्माण पर ब्रेक लगना शुरू हो गया है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के बीच 75 से ज्यादा बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट रुक गए हैं। इन पर कुल मिलाकर 130 अरब डॉलर का निवेश होना था, जो अब ठप हो चुका है। यह संख्या पिछले साल पूरे 12 महीनों में रुके प्रोजेक्टों के बराबर है। नेशनवाइड स्तर पर दोनों राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती चिंताओं के बीच यह स्थिति पैदा हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप के AI विकास को अमेरिका में तेज करने के प्रयासों के बावजूद, बिजली और पानी की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर व्यापक विरोध उभर रहा है।
इस विरोध का कारण है कि डेटा सेंटर अपने विशाल आकार और ऊर्जा खपत के कारण स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल रहे हैं। इन सुविधाओं को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है, जिससे आसपास के इलाकों में बिजली कटौती और पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय भी है। ऐसे में, स्थानीय प्रशासन और राज्यों की सरकारें इन परियोजनाओं को मंजूरी देने में सावधानी बरत रही हैं।
अमेरिका में डेटा सेंटर निर्माण का बढ़ता संकट
डेटा सेंटर निर्माण उद्योग अमेरिका में पिछले एक दशक से तेजी से बढ़ रहा था। बड़ी टेक कंपनियां और निवेशक इन सुविधाओं में अरबों डॉलर लगा रहे थे ताकि क्लाउड कंप्यूटिंग, AI प्रशिक्षण और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग की मांग पूरी की जा सके। मगर 2026 की शुरुआत से ही इस ग्रोथ पर ब्रेक लग गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच 75 से ज्यादा प्रोजेक्ट रुक गए, जिनमें से कई अरब डॉलर के निवेश वाले थे। यह संख्या 2025 के पूरे साल में रुके प्रोजेक्टों के बराबर है, जो इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई है।
इस विरोध का मुख्य कारण है ऊर्जा और पानी की खपत। डेटा सेंटर इतने बड़े होते हैं कि उन्हें चलाने के लिए कई मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, जो स्थानीय ग्रिड पर भारी बोझ डालती है। इसके अलावा, इन सुविधाओं को ठंडा रखने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आसपास के जल संसाधनों पर दबाव पड़ता है। कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन और निवासियों ने इन परियोजनाओं के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले महीनों में और भी ज्यादा प्रोजेक्ट रुक सकते हैं, जिससे अमेरिका में डेटा सेंटर निर्माण उद्योग को बड़ा झटका लगेगा।
राजनीतिक विभाजन के बावजूद बढ़ता विरोध
अमेरिका में राजनीतिक विभाजन के बावजूद, डेटा सेंटर निर्माण के खिलाफ आवाजें दोनों राजनीतिक दलों से उठ रही हैं। राष्ट्रपति ट्रंप, जो AI विकास को अमेरिका में तेज करने के प्रयास कर रहे हैं, के बावजूद कई रिपिपब्लिकन नेता भी इन परियोजनाओं के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनका तर्क है कि इन सुविधाओं से स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है और इससे आम लोगों के जीवन पर असर पड़ रहा है। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सदस्य भी पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इन प्रोजेक्टों का विरोध कर रहे हैं।

इस विरोध का कारण केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने इन परियोजनाओं को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जबकि अन्य राज्यों में कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राज्यों में डेटा सेंटर निर्माण के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाए जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में पानी और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं। इससे निवेशकों के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे कहां नए प्रोजेक्ट शुरू करें।
ऊर्जा और पानी की कमी: डेटा सेंटर उद्योग के लिए बड़ा खतरा
डेटा सेंटर उद्योग के लिए ऊर्जा और पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। इन सुविधाओं को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है, जो स्थानीय ग्रिड पर बोझ डालती है। कई राज्यों में ग्रिड पहले से ही ओवरलोडेड हैं, और डेटा सेंटर के आने से स्थिति और खराब हो सकती है। इसके अलावा, इन सुविधाओं को ठंडा रखने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आसपास के जल संसाधनों पर दबाव पड़ता है। कई राज्यों में पानी की कमी पहले से ही एक बड़ी समस्या है, और डेटा सेंटर के निर्माण से यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई कंपनियां पहले से ही ऊर्जा-कुशल तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, मगर यह पर्याप्त नहीं है। सरकारों और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे जो डेटा सेंटर उद्योग को टिकाऊ बनाने में मदद करें। इसके अलावा, निवेशकों को भी ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने की जरूरत है जहां ऊर्जा और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
AI विकास पर पड़ेगा असर?








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डेटा सेंटर उद्योग का ठहराव AI विकास पर भी असर डाल सकता है। AI मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर की जरूरत होती है। अगर इन सुविधाओं का निर्माण रुकता रहेगा, तो AI विकास की गति भी धीमी हो सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप जैसे नेता AI विकास को अमेरिका में तेज करने की कोशिश कर रहे हैं, मगर अगर डेटा सेंटर निर्माण पर ब्रेक लगता रहा, तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा, अमेरिका में AI स्टार्टअप और बड़ी टेक कंपनियों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कई कंपनियां अपने AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए क्लाउड सेवाओं पर निर्भर हैं, मगर अगर डेटा सेंटर निर्माण रुकता रहेगा, तो इन सेवाओं की उपलब्धता और कीमत पर असर पड़ सकता है। इससे अमेरिका में AI उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी असर पड़ सकता है।
निवेशकों और कंपनियों के लिए क्या हैं विकल्प?
डेटा सेंटर निर्माण पर ब्रेक लगने के बाद निवेशकों और कंपनियों के लिए विकल्प सीमित हो गए हैं। कई कंपनियां अब ऐसे क्षेत्रों की तलाश कर रही हैं जहां ऊर्जा और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उदाहरण के लिए, कुछ कंपनियां यूरोप या एशिया के देशों में डेटा सेंटर स्थापित करने पर विचार कर रही हैं, जहां ऊर्जा संसाधन अधिक उपलब्ध हैं। मगर इन क्षेत्रों में भी राजनीतिक और नियामक चुनौतियां हैं, जो निवेशकों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।
वहीं, कुछ कंपनियां ऊर्जा-कुशल तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, जैसे कि पुनर्नवीनीकरण ऊर्जा का इस्तेमाल करना या पानी के इस्तेमाल को कम करना। मगर ये तकनीकें अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं, और इनमें भारी निवेश की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियां इन तकनीकों में निवेश करती रहेंगी, तो आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर उद्योग को टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

भविष्य में क्या उम्मीद की जा सकती है?
2026 की पहली तिमाही में डेटा सेंटर निर्माण पर ब्रेक लगने के बाद उद्योग जगत में अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले महीनों में और भी ज्यादा प्रोजेक्ट रुक सकते हैं। इससे अमेरिका में डेटा सेंटर उद्योग को बड़ा झटका लगेगा और AI विकास की गति भी धीमी हो सकती है।
मगर दूसरी ओर, यह स्थिति उद्योग जगत के लिए एक सबक भी हो सकती है। कंपनियां और सरकारें मिलकर ऐसे नियम बना सकती हैं जो डेटा सेंटर उद्योग को टिकाऊ बनाने में मदद करें। उदाहरण के लिए, सरकारें ऊर्जा और पानी के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं, जबकि कंपनियां ऊर्जा-कुशल तकनीकों में निवेश कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो डेटा सेंटर उद्योग भविष्य में और भी मजबूत हो सकता है।
निष्कर्ष
2026 की शुरुआत से ही अमेरिका में डेटा सेंटर निर्माण पर ब्रेक लगना शुरू हो गया है। 75 से ज्यादा प्रोजेक्ट रुक गए हैं, जिनमें 130 अरब डॉलर का निवेश होना था। इसका मुख्य कारण है ऊर्जा और पानी की कमी, जिसके कारण स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है। राजनीतिक विभाजन के बावजूद दोनों दलों के नेता इस मुद्दे पर एकमत हैं कि इन परियोजनाओं को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारों, स्थानीय प्रशासन और कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। ऊर्जा-कुशल तकनीकों में निवेश, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और नियामक ढांचे में सुधार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो डेटा सेंटर उद्योग भविष्य में और भी टिकाऊ और मजबूत बन सकता है। मगर अगर समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो अमेरिका में AI विकास और तकनीकी उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है।
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