स्टेबलकॉइन्स का असली मकसद था वित्त को बदलना, मगर वे पड़े रहे बेकार पैसे
द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-14

क्रिप्टो जगत में स्टेबलकॉइन्स को उद्योग की सबसे बड़ी सफलता माना जाता है। वे मूल रूप से डिजिटल डॉलर हैं जो ट्रेडिंग, भुगतान और लेन-देन के लिए इस्तेमाल होते हैं। मगर हाल के आँकड़ों से पता चलता है कि लगभग 315 अरब डॉलर की यह राशि आज भी ज्यादातर बेकार पड़ी है। स्टेबलकॉइन्स ने डॉलर को डिजिटल रूप तो दे दिया, मगर उन्हें काम करने योग्य बनाने में नाकाम रहे हैं। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि क्रिप्टो क्षेत्र दक्षता के लिए जाना जाता है, मगर यहाँ निष्क्रिय पड़े पैसे पारंपरिक वित्त के लिए एक बड़ी समस्या बन गए हैं।
स्टेबलकॉइन्स: क्रिप्टो की सबसे सफल कहानी, मगर अधूरी
स्टेबलकॉइन्स का उद्देश्य था कि वे पारंपरिक वित्त प्रणाली में क्रांति लाएँ। वे क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करते हैं, जहाँ निवेशक बिना कीमतों के उतार-चढ़ाव के डॉलर के बराबर मूल्य रख सकते हैं। इसके अलावा, वे डीफाई (DeFi) पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना भी हैं, जहाँ उन्हें ऋण देने, उधार लेने और अन्य वित्तीय गतिविधियों के लिए संपार्श्विक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मगर वास्तविकता यह है कि अधिकांश स्टेबलकॉइन्स आज भी निष्क्रिय हैं। वे वॉलेट्स में पड़े रहते हैं, एक्सचेंजों पर रखे जाते हैं या फिर कंपनियों के कोषागारों में सुरक्षित रहते हैं। वे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं, मगर उनका उपयोग कहीं नहीं हो रहा है।
यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि पारंपरिक वित्त में निष्क्रिय पड़े पैसे को तुरंत काम में लाया जाता है। बैंक और वित्तीय संस्थान अपने अतिरिक्त धन को मनी मार्केट फंड्स या क्रेडिट मार्केट्स में निवेश कर देते हैं, ताकि उन्हें रिटर्न मिल सके। मगर क्रिप्टो जगत में ऐसा नहीं हो रहा है। यहाँ स्टेबलकॉइन्स को रखने का एकमात्र उद्देश्य उन्हें सुरक्षित रखना है, न कि उन्हें काम में लाना। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की पूंजी दक्षता प्रभावित होती है।
स्टेबलकॉइन्स क्यों नहीं कर पा रहे हैं काम?
स्टेबलकॉइन्स के निष्क्रिय रहने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है कि क्रिप्टो जगत में अभी तक ऐसी प्रणाली विकसित नहीं हुई है जो स्टेबलकॉइन्स को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ सके। डीफाई में मिलने वाला रिटर्न ज्यादातर टोकन इमिशन और नए निवेशकों के भरोसे चलता है, न कि वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर। इससे मिलने वाला रिटर्न स्थायी नहीं होता और निवेशकों का विश्वास भी कमजोर होता जाता है।

इसके अलावा, स्टेबलकॉइन्स की स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें नियमित रूप से संपार्श्विक में रखा जाता है। मगर इस संपार्श्विक का उपयोग वास्तविक अर्थव्यवस्था में नहीं हो रहा है। उदाहरण के लिए, अगर किसी स्टेबलकॉइन को अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स में संपार्श्विक के रूप में रखा जाता है, तो वह राशि सरकार के पास सुरक्षित रहती है, मगर उसका उपयोग कहीं और नहीं हो रहा है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की पूंजी का अपव्यय होता है।
क्रिप्टो जगत में रिटर्न की तलाश: असली समस्या
क्रिप्टो जगत में निवेशकों को रिटर्न दिलाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। स्टेकिंग रिवार्ड्स, लिक्विडिटी माइनिंग और लीवरेज्ड डीफाई स्ट्रेटेजीज जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया है। मगर इनमें से ज्यादातर तरीके टिकाऊ नहीं रहे हैं। स्टेकिंग रिवार्ड्स और लिक्विडिटी माइनिंग में मिलने वाला रिटर्न ज्यादातर नए टोकन इमिशन पर निर्भर करता है, जो अंततः कम हो जाता है। लीवरेज्ड डीफाई स्ट्रेटेजीज में जोखिम बहुत अधिक होता है और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निवेशकों को अब ऐसे रिटर्न की तलाश है जो स्थायी, पारदर्शी और वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हों। मगर क्रिप्टो जगत में अभी तक ऐसी प्रणाली विकसित नहीं हुई है जो इसे सुनिश्चित कर सके। स्टेबलकॉइन्स को वास्तविक दुनिया के संपत्ति वर्गों जैसे रियल एस्टेट, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की आवश्यकता है। इससे न केवल निवेशकों को स्थायी रिटर्न मिलेगा, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की पूंजी दक्षता भी बढ़ेगी।
स्टेबलकॉइन्स के भविष्य का रास्ता: ऑनचेन डॉलर्स का वास्तविक उपयोग
स्टेबलकॉइन्स के भविष्य का असली रास्ता ऑनचेन डॉलर्स को वास्तविक संपत्ति वर्गों में निवेश करने में निहित है। इसका मतलब है कि स्टेबलकॉइन्स को उन परियोजनाओं और संपत्तियों में लगाया जाए जो वास्तविक आर्थिक मूल्य उत्पन्न करती हैं। उदाहरण के लिए, स्टेबलकॉइन्स का उपयोग रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के वित्तपोषण, छोटे और मध्यम उद्यमों को ऋण देने या सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने के लिए किया जा सकता है।
इसके लिए डीफाई प्लेटफॉर्म्स को अपने मॉडल बदलने की आवश्यकता है। उन्हें ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जो स्टेबलकॉइन्स को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ सकें। उदाहरण के लिए, ऑनचेन रियल एस्टेट फंड्स या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स प्लेटफॉर्म्स विकसित किए जा सकते हैं, जहाँ स्टेबलकॉइन्स का उपयोग वास्तविक संपत्ति खरीदने के लिए किया जा सके। इससे न केवल निवेशकों को रिटर्न मिलेगा, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की पूंजी दक्षता भी बढ़ेगी।








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प्रायोजित · पिछला प्रदर्शन भविष्य के परिणामों का संकेत नहीं है। यह वित्तीय सलाह नहीं है।

डीफाई में बदलाव की जरूरत: वास्तविक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव
डीफाई प्लेटफॉर्म्स को अपने मॉडल में बदलाव लाने की आवश्यकता है। उन्हें ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जो स्टेबलकॉइन्स को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़ सकें। उदाहरण के लिए, ऑनचेन क्रेडिट मार्केट्स का विकास किया जा सकता है, जहाँ स्टेबलकॉइन्स का उपयोग छोटे और मध्यम उद्यमों को ऋण देने के लिए किया जा सके। इससे न केवल स्टेबलकॉइन्स का उपयोग होगा, बल्कि वास्तविक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, डीफाई प्लेटफॉर्म्स को अपने जोखिम प्रबंधन मॉडल में सुधार करना होगा। उन्हें ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जो निवेशकों को स्थायी और पारदर्शी रिटर्न प्रदान कर सकें। इसके लिए उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जुड़े उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, न कि केवल टोकन इमिशन और नए निवेशकों के भरोसे चलने वाले मॉडल पर।
निवेशकों के लिए सबक: स्थायी रिटर्न की तलाश
निवेशकों को अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स और उत्पादों की तलाश करनी चाहिए जो उन्हें स्थायी और पारदर्शी रिटर्न प्रदान कर सकें। स्टेबलकॉइन्स में निवेश करने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि केवल स्टेबल रहने से काम नहीं चलेगा। उन्हें ऐसे उत्पादों की तलाश करनी चाहिए जो वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हों और उन्हें स्थायी रिटर्न प्रदान कर सकें।
इसके लिए निवेशकों को डीफाई प्लेटफॉर्म्स के मॉडल और उनकी वित्तीय स्थिति की गहन समीक्षा करनी चाहिए। उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म्स को चुनना चाहिए जो वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हों और जो अपने निवेशकों को पारदर्शी रिपोर्टिंग प्रदान करें। इसके अलावा, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लानी चाहिए और केवल स्टेबलकॉइन्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

नियामकों की भूमिका: पारदर्शिता और सुरक्षा
नियामकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्हें ऐसे नियम विकसित करने होंगे जो स्टेबलकॉइन्स के वास्तविक उपयोग को प्रोत्साहित करें। इसके लिए उन्हें स्टेबलकॉइन्स के संपार्श्विकन, ऑडिटिंग और रिपोर्टिंग के मानकों को सख्त करना होगा। इसके अलावा, उन्हें डीफाई प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसे नियम विकसित करने होंगे जो निवेशकों के हितों की रक्षा करें और उन्हें स्थायी रिटर्न प्रदान करें।
नियामकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्टेबलकॉइन्स का उपयोग केवल सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से किया जाए। इसके लिए उन्हें स्टेबलकॉइन्स के जारीकर्ताओं पर कड़ी नजर रखनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने संपार्श्विकन को वास्तविक संपत्ति वर्गों में निवेश करें। इससे न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।
निष्कर्ष: स्टेबलकॉइन्स का भविष्य अब उनके उपयोग पर निर्भर
स्टेबलकॉइन्स क्रिप्टो जगत की सबसे बड़ी सफलता माने जाते हैं, मगर उनका असली मकसद अभी पूरा नहीं हुआ है। वे आज भी ज्यादातर बेकार पड़े हैं और उनका उपयोग वास्तविक आर्थिक गतिविधियों में नहीं हो रहा है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि स्टेबलकॉइन्स का भविष्य अधूर है। अगर उन्हें वास्तविक संपत्ति वर्गों में निवेश किया जाए और डीफाई प्लेटफॉर्म्स अपने मॉडल में बदलाव लाएँ, तो स्टेबलकॉइन्स क्रिप्टो जगत में क्रांति ला सकते हैं।
निवेशकों, प्लेटफॉर्म्स और नियामकों को मिलकर काम करना होगा ताकि स्टेबलकॉइन्स को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके। इसके लिए उन्हें ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जो स्थायी और पारदर्शी रिटर्न प्रदान करें। अगर ऐसा होता है, तो स्टेबलकॉइन्स न केवल क्रिप्टो जगत में, बल्कि पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति ला सकते हैं।
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