बेस नेटवर्क में लगातार दो बार हुई रुकावट: क्या था कारण और इसका आगे क्या असर होगा?
द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-28

Coinbase द्वारा संचालित बेस लेयर-2 नेटवर्क में पिछले सप्ताह लगातार दो बार बड़े पैमाने पर रुकावट आई थी। पहली घटना गुरुवार को हुई, जो 116 मिनट तक चली, जबकि दूसरी शुक्रवार को 20 मिनट के लिए नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया। इन रुकावटों के पीछे एक तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसे कंपनी ने बाद में स्वीकार किया। बेस टीम के अनुसार, यह समस्या सिक्वेंसर नामक घटक में मौजूद बग के कारण हुई थी, जो लेयर-2 नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
लेयर-2 नेटवर्क में सिक्वेंसर की भूमिका क्या है?
लेयर-2 नेटवर्क ब्लॉकचेन की मुख्य श्रृंखला (मेननेट) पर लोड कम करने के लिए बनाए जाते हैं। ये नेटवर्क ट्रांजैक्शन को तेजी से प्रोसेस करते हैं और मुख्य ब्लॉकचेन पर केवल अंतिम स्टेट भेजते हैं। सिक्वेंसर ऐसे सॉफ्टवेयर घटक होते हैं, जो लेयर-2 नेटवर्क पर ट्रांजैक्शन के क्रम को तय करते हैं। दूसरे शब्दों में, वे तय करते हैं कि कौन सी ट्रांजैक्शन पहले प्रोसेस होगी और कौन सी बाद में। अगर सिक्वेंसर में कोई दिक्कत आ जाए, तो पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है।
बेस नेटवर्क भी इसी सिद्धांत पर काम करता है। यह एक सेंट्रलाइज्ड सिक्वेंसर का उपयोग करता है, जिसका मतलब है कि अगर इसमें कोई बग या खराबी आ जाए, तो पूरा नेटवर्क रुक सकता है। यह समस्या केवल बेस तक ही सीमित नहीं है। इससे पहले भी अन्य लेयर-2 नेटवर्क जैसे Arbitrum, OP Mainnet और zkSync Era में इसी तरह की घटनाएं हुई हैं, जहां सिक्वेंसर से जुड़ी खराबियों के कारण नेटवर्क रुक गया था।
सिक्वेंसर बग का असल कारण क्या था?
बेस टीम द्वारा प्रकाशित एक पोस्ट-मॉर्टेम रिपोर्ट में बताया गया कि सिक्वेंसर में मौजूद बग ने "स्टेल जर्नल स्टेट" (पुरानी स्थिति) को बनाए रखा। दरअसल, जब कोई अमान्य ट्रांजैक्शन सिक्वेंसर द्वारा प्रोसेस किया गया, तो उसे रद्द कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन गलती से, सिस्टम ने उन एकाउंट्स और स्टोरेज स्लॉट्स की पुरानी स्थिति को बनाए रखा, जिन्हें ट्रांजैक्शन के दौरान एक्सेस किया गया था।
इसका परिणाम यह हुआ कि जब सिस्टम को रीसेट किया गया, तो सिक्वेंसर पुरानी स्थिति के कारण आगे की ट्रांजैक्शन को प्रोसेस नहीं कर पाया। इसके अलावा, एक "रेस कंडीशन" (प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति) उत्पन्न हुई, जिसके कारण सिक्वेंसर वापस ट्रैक पर नहीं आ सके। इसी वजह से दूसरी बार नेटवर्क रुक गया। टीम ने स्वीकार किया कि इस समस्या को ठीक करने में ज्यादा समय लगा, क्योंकि इसकी वजह से संबंधित बुनियादी ढांचे में भी कुछ तकनीकी दिक्कतें पैदा हो गई थीं, जो मूल बग से अलग थीं।

कैसे हुई पहली और दूसरी रुकावट?
पहली बार जब अमान्य ट्रांजैक्शन सिक्वेंसर द्वारा प्रोसेस किया गया, तो उसने उसे रद्द कर दिया। लेकिन पुरानी स्थिति बनी रहने के कारण, सिस्टम आगे की ट्रांजैक्शन को प्रोसेस नहीं कर पाया। इसके परिणामस्वरूप, नेटवर्क 116 मिनट तक रुक गया। टीम ने इस दौरान एक पैच अप्लाई किया, जिससे पुरानी स्थिति को सही किया गया और सिस्टम वापस सामान्य हुआ।
हालांकि, दूसरी बार जब सिस्टम रीसेट किया गया, तो रेस कंडीशन उत्पन्न हो गई। इसका मतलब है कि दो या अधिक प्रक्रियाएं एक ही समय पर एक ही संसाधन तक पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, जिसके कारण सिस्टम कन्फ्यूज हो गया और आगे की ट्रांजैक्शन को प्रोसेस नहीं कर पाया। इससे नेटवर्क 20 मिनट के लिए पूरी तरह से ठप हो गया। टीम ने बताया कि इस बार समस्या को ठीक करने में ज्यादा समय लगा, क्योंकि इससे संबंधित बुनियादी ढांचे में भी कुछ तकनीकी दिक्कतें पैदा हो गई थीं।
बेस टीम ने क्या किया और आगे क्या बदलाव होंगे?
बेस टीम ने इस समस्या को ठीक करने के लिए तुरंत एक पैच अप्लाई किया। उन्होंने सिक्वेंसर को अपडेट किया, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा, टीम ने बताया कि वे आगे चलकर प्रोटोकॉल में "फज़ टेस्टिंग" नामक तकनीक को बेहतर बनाएंगे। फज़ टेस्टिंग में सिस्टम को बड़े पैमाने पर यादृच्छिक, विकृत या अप्रत्याशित इनपुट्स के साथ परीक्षण किया जाता है, ताकि संभावित बग्स का पता लगाया जा सके।








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टीम ने यह भी कहा कि वे "ग्रेसफुल रिकवरी" नामक एक नई प्रणाली पर काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में अगर ऐसी कोई घटना होती है, तो वैलिडेटर नोड्स को मैनुअल रीस्टार्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका मतलब है कि अगर सिस्टम में कोई गड़बड़ी आती है, तो वह खुद ही ठीक हो जाएगा और नेटवर्क को फिर से शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या यह पहली बार हुआ है जब बेस नेटवर्क में ऐसी घटना हुई है?
नहीं, यह पहली बार नहीं है जब बेस नेटवर्क में ऐसी घटना हुई है। इससे पहले भी बेस नेटवर्क में कई बार रुकावट आई है, जिनमें से अधिकांश सिक्वेंसर से संबंधित थीं। उदाहरण के लिए, पिछले वर्ष भी बेस नेटवर्क में इसी तरह की घटना हुई थी, जब सिक्वेंसर में खराबी के कारण नेटवर्क रुक गया था। हालांकि, इस बार की घटना थोड़ी अलग थी, क्योंकि इसमें दो बार रुकावट आई और दोनों बार का कारण अलग था।
इस घटना का बेस उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स पर क्या असर पड़ा?
बेस नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के लिए यह घटना काफी निराशाजनक रही। पहली बार जब नेटवर्क 116 मिनट तक रुका, तो उपयोगकर्ताओं को अपने ट्रांजैक्शन पूरा करने में दिक्कत हुई। कई लोगों ने अपने फंड्स को एक्सेस नहीं कर पाया, जबकि कुछ डेवलपर्स ने अपने स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को डिप्लॉय नहीं कर पाए। दूसरी बार जब नेटवर्क 20 मिनट तक रुका, तो स्थिति थोड़ी बेहतर थी, लेकिन फिर भी उपयोगकर्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद, कई उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। कुछ ने तो बेस नेटवर्क को पूरी तरह छोड़ने की भी बात कही। हालांकि, बेस टीम ने तुरंत इस घटना पर प्रतिक्रिया दी और उपयोगकर्ताओं को आश्वासन दिया कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं।

आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
बेस टीम ने स्पष्ट किया है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएंगे। उन्होंने फज़ टेस्टिंग और ग्रेसफुल रिकवरी जैसी तकनीकों को बेहतर बनाने का वादा किया है। इसके अलावा, वे सिक्वेंसर के डिजाइन में भी सुधार करेंगे, ताकि ऐसी गड़बड़ियां भविष्य में न हों।
उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स को भी सलाह दी जाती है कि वे अपने फंड्स को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा दो या अधिक वॉलेट्स का उपयोग करें। इसके अलावा, वे अपने ट्रांजैक्शंस को पूरा करने के लिए हमेशा वैकल्पिक नेटवर्क्स का भी उपयोग कर सकते हैं, ताकि अगर एक नेटवर्क रुक जाए, तो वे दूसरे नेटवर्क का उपयोग कर सकें।
निष्कर्ष
बेस लेयर-2 नेटवर्क में लगातार दो बार हुई रुकावट एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई थी, जिसका कारण सिक्वेंसर में मौजूद बग था। इस घटना ने एक बार फिर से सेंट्रलाइज्ड सिक्वेंसर पर निर्भरता के जोखिम को उजागर किया है। हालांकि, बेस टीम ने इस घटना से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया है।
उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स को भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्हें अपने फंड्स को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने चाहिए। साथ ही, उन्हें बेस टीम द्वारा किए जा रहे सुधारों पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वे जान सकें कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई नहीं जाती हैं। कुल मिलाकर, यह घटना ब्लॉकचेन तकनीक की कमजोरियों को उजागर करने के साथ-साथ सुधार की दिशा में एक कदम भी है।
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