माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में एआई फीचर्स: अब बिना न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट वाले पीसी पर भी उपलब्ध
द्वारा Mag-Info Tech editorial · 2026-06-15

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 11 में एआई फीचर्स को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। कंपनी अब उन पीसी पर भी विंडोज एआई फीचर्स उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है जिनमें न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (एनपीयू) नहीं है। इसका मतलब है कि जिन उपयोगकर्ताओं के पीसी में एनपीयू नहीं है, वे भी अब स्थानीय एआई क्षमताओं का लाभ उठा सकेंगे। यह बदलाव विंडोज ऐप एसडीके और विंडोज इंसाइडर एक्सपेरिमेंटल चैनल के जरिए टेस्ट किया जा रहा है। डेवलपर मोड को ऑन करने के बाद उपयोगकर्ता इस फीचर का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस कदम से माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य अपने एआई फीचर्स को ज्यादा से ज्यादा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना है।
एनपीयू के बिना भी एआई फीचर्स: माइक्रोसॉफ्ट का नया प्रयोग
माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से विंडोज में एआई फीचर्स को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन अब तक ये फीचर्स केवल उन्हीं पीसी पर उपलब्ध थे जिनमें न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (एनपीयू) लगा हुआ था। एनपीयू एक विशेष प्रकार का प्रोसेसर होता है जो एआई से संबंधित कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद करता है। हालांकि, अधिकांश पीसी उपयोगकर्ताओं के पास ऐसे एनपीयू वाले डिवाइस नहीं होते हैं, जिससे उन्हें विंडोज के एआई फीचर्स का लाभ नहीं मिल पाता था। अब माइक्रोसॉफ्ट इस सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा है। कंपनी विंडोज ऐप एसडीके और विंडोज इंसाइडर एक्सपेरिमेंटल चैनल के जरिए उन पीसी पर भी एआई फीचर्स उपलब्ध कराने की टेस्टिंग कर रही है जिनमें एनपीयू नहीं है। इसका मतलब है कि जिन उपयोगकर्ताओं के पास पुराने या मध्यम स्तर के पीसी हैं, वे भी अब विंडोज 11 में उपलब्ध एआई फीचर्स का लाभ उठा सकेंगे। इस बदलाव से माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य अपने एआई इकोसिस्टम को और व्यापक बनाना है।
इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य विंडोज में एआई फीचर्स की पहुंच को बढ़ाना है। माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले कुछ समय में विंडोज 11 में कई एआई फीचर्स जोड़े हैं, जैसे कि विंडोज कोपायलट, जो उपयोगकर्ताओं को एआई चैटबॉट और अन्य एआई टूल्स तक पहुंच प्रदान करता है। हालांकि, इन फीचर्स को चलाने के लिए एनपीयू की आवश्यकता होती थी, जिससे कई उपयोगकर्ताओं को इन सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता था। अब माइक्रोसॉफ्ट इस बाधा को दूर करने की कोशिश कर रहा है। कंपनी विंडोज ऐप एसडीके के माध्यम से डेवलपर्स को ऐसे टूल्स उपलब्ध करा रही है, जिनकी मदद से वे अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को जोड़ सकेंगे,怕怕 भले ही उनके पीसी में एनपीयू न हो।
विंडोज ऐप एसडीके और इंसाइडर चैनल: कैसे काम करेगा नया फीचर
माइक्रोसॉफ्ट का यह नया प्रयोग विंडोज ऐप एसडीके और विंडोज इंसाइडर एक्सपेरिमेंटल चैनल पर आधारित है। विंडोज ऐप एसडीके एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से डेवलपर्स अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को आसानी से जोड़ सकते हैं। वहीं, विंडोज इंसाइडर एक्सपेरिमेंटल चैनल एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट नए फीचर्स को टेस्ट करता है और उपयोगकर्ताओं से फीडबैक लेता है। इस बार माइक्रोसॉफ्ट ने इस चैनल के माध्यम से उन पीसी पर भी एआई फीचर्स उपलब्ध कराने की टेस्टिंग शुरू की है जिनमें एनपीयू नहीं है।

उपयोगकर्ताओं को इस फीचर का लाभ उठाने के लिए विंडोज 11 के डेवलपर मोड को ऑन करना होगा। इसके बाद वे विंडोज ऐप एसडीके के माध्यम से अपने पीसी पर एआई फीचर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, इस समय यह फीचर केवल टेस्टिंग के दौर में है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को इसे इस्तेमाल करने से पहले इसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझ लेना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट किया है कि यह फीचर अभी पूरी तरह से स्टेबल नहीं है, और इसमें समय के साथ कई बदलाव हो सकते हैं।
डिस्क्रीट जीपीयू पर आधारित एआई फीचर्स: तकनीकी बदलाव
माइक्रोसॉफ्ट का यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है। अब तक विंडोज में एआई फीचर्स को चलाने के लिए एनपीयू की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब माइक्रोसॉफ्ट डिस्क्रीट जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) का इस्तेमाल करके भी एआई फीचर्स को चलाने की कोशिश कर रहा है। जीपीयू पारंपरिक रूप से ग्राफिक्स प्रोसेसिंग के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इनकी मदद से एआई से संबंधित कार्यों को भी पूरा किया जा सकता है। जीपीयू में बड़ी संख्या में कोर होते हैं, जो समानांतर में काम कर सकते हैं, जिससे वे एआई मॉडल्स को चलाने में सक्षम होते हैं।
इस बदलाव से उन उपयोगकर्ताओं को भी एआई फीचर्स का लाभ मिल सकेगा जिनके पीसी में एनपीयू नहीं है। हालांकि, जीपीयू पर आधारित एआई फीचर्स की गति और दक्षता एनपीयू की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन फिर भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है। माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य है कि वे अपने एआई फीचर्स को ज्यादा से ज्यादा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाएं, चाहे उनके पीसी में कोई भी हार्डवेयर लगा हो। इस बदलाव से डेवलपर्स को भी फायदा होगा, क्योंकि वे अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को जोड़ने के लिए ज्यादा विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के लिए निहितार्थ








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इस बदलाव का उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए इसका मतलब है कि वे बिना महंगे हार्डवेयर वाले पीसी पर भी विंडोज के एआई फीचर्स का लाभ उठा सकेंगे। इससे उन्हें एआई चैटबॉट, ऑटोमेशन टूल्स और अन्य एआई आधारित सुविधाओं तक पहुंच मिल सकेगी। वहीं, डेवलपर्स के लिए यह एक नया अवसर है, क्योंकि वे अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को जोड़ने के लिए ज्यादा विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे उनके एप्लिकेशन ज्यादा स्मार्ट और उपयोगकर्ता-अनुकूल बन सकेंगे।

हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जीपीयू पर आधारित एआई फीचर्स की गति और दक्षता एनपीयू की तुलना में कम हो सकती है। इसके अलावा, इस फीचर को अभी टेस्टिंग के दौर में है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को इसे इस्तेमाल करने से पहले इसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझ लेना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट किया है कि यह फीचर अभी पूरी तरह से स्टेबल नहीं है, और इसमें समय के साथ कई बदलाव हो सकते हैं।
विंडोज एआई इकोसिस्टम का भविष्य
माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम विंडोज एआई इकोसिस्टम के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। कंपनी लगातार अपने एआई फीचर्स को बेहतर बनाने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इस बदलाव से विंडोज 11 में एआई फीचर्स की पहुंच और भी व्यापक हो जाएगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को ज्यादा सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, इस कदम से डेवलपर्स को भी नए अवसर मिलेंगे, क्योंकि वे अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को जोड़ने के लिए ज्यादा विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले कुछ समय में विंडोज 11 में कई नए एआई फीचर्स जोड़े हैं, जैसे कि विंडोज कोपायलट, जो उपयोगकर्ताओं को एआई चैटबॉट और अन्य एआई टूल्स तक पहुंच प्रदान करता है। अब इस बदलाव के साथ, कंपनी अपने एआई इकोसिस्टम को और भी मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। इससे न केवल उपयोगकर्ताओं को फायदा होगा, बल्कि डेवलपर्स और टेक उद्योग को भी नए अवसर मिलेंगे।
तकनीकी चुनौतियां और संभावित समाधान
हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ तकनीकी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जीपीयू पर आधारित एआई फीचर्स की गति और दक्षता एनपीयू की तुलना में कम हो सकती है। इसके अलावा, इस फीचर को अभी टेस्टिंग के दौर में है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को इसे इस्तेमाल करने से पहले इसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझ लेना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट किया है कि यह फीचर अभी पूरी तरह से स्टेबल नहीं है, और इसमें समय के साथ कई बदलाव हो सकते हैं।

इन चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए माइक्रोसॉफ्ट को अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों पर काम करना होगा। कंपनी को जीपीयू आधारित एआई फीचर्स की गति और दक्षता को बेहतर बनाने के लिए नए एल्गोरिदम और तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं को इस फीचर के इस्तेमाल के दौरान आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार करना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उपयोगकर्ताओं को एआई फीचर्स का इस्तेमाल करते समय किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उपयोगकर्ताओं के लिए व्यावहारिक सलाह
उपयोगकर्ताओं के लिए इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। सबसे पहले, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पीसी में विंडोज 11 का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल है। इसके बाद, उन्हें विंडोज इंसाइडर प्रोग्राम में शामिल होना होगा और एक्सपेरिमेंटल चैनल को चुनना होगा। इसके बाद, उन्हें विंडोज 11 के डेवलपर मोड को ऑन करना होगा। इसके बाद वे विंडोज ऐप एसडीके के माध्यम से अपने पीसी पर एआई फीचर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।
हालांकि, उपयोगकर्ताओं को इस फीचर को इस्तेमाल करने से पहले इसकी सीमाओं और संभावित जोखिमों को समझ लेना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट ने स्पष्ट किया है कि यह फीचर अभी पूरी तरह से स्टेबल नहीं है, इसलिए उपयोगकर्ताओं को इसे सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं को अपने पीसी के हार्डवेयर विनिर्देशों को भी ध्यान में रखना चाहिए, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके पीसी पर एआई फीचर्स सुंडोज एआई इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। कंपनी लंबे समय से अपने एआई फीचर्स को ज्यादा से ज्यादा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, और अब उसने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विंडोज 11 में एआई फीचर्स को बिना एनपीयू वाले पीसी पर भी उपलब्ध कराने से उपयोगकर्ताओं को नए अवसर मिलेंगे, और डेवलपर्स को अपने एप्लिकेशन में एआई फीचर्स को जोड़ने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे। हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं, जिनका समाधान निकालने के लिए माइक्रोसॉफ्ट को अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों पर काम करना होगा। कुल मिलाकर, यह एक सकारात्मक कदम है, जो विंडोज एआई इकोसिस्टम को और भी मजबूत बनाने में मदद करेगा।
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